Thursday, December 13, 2018

सारे पन्ने

सारे पन्ने ,सारे नगमे ,सारे किस्से ,
अटे पड़े है तेरे तेरे नाम से ..
अब तुम नही तो लिखू क्या ,
ख्याल, ज़हन मे तुम्हारे ही थे ,
करोदती हूँ जब मन अपना,
कहते है, काम  रखो अपने काम से..

थोड़ा गुरूर मेरा सामने क्या जो आगया ,
मेरा नाम तुमने भी मिटा दिया ,
तुमने भी ना करी कोशिश मनाने की ,
बैठ गयें बस आराम से ..

आज़ याद ने फिर झकझोर दिया,
फिर हवा ने रंग तेरा घोल दिया ,
ज़िक्र तेरा कई बार निकल आया ज़बां पर,
श्याम, तुम बसेरा डाल बैठ गयें शाम से ..

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