न जाने तुम्हारी छोटी छोटी बातों में
क्या सुन लेती हूँ जो तुमने कभी कहा नहीं ¦
ना जाने पहले अच्छा था
या अब अच्छा हैं ;
इस मोहब्बत में
पर जैसे रंग था वैसे अब रहा नहीं ¦
पेहले उम्मीद पर मेरा जंहा था क़ायम
थी उतावली तुम्हारी बातें भी
ना अब उतावलापन ना बातें रही हैं
अब मेरे पास वो उम्मीद का जंहा नहीं ¦
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