Sunday, January 12, 2020

मै लिखता हूँ likhta

मै लिखता नही किसी को 
खुश करने को 
मैं लिखता नही कि कुछ बदलना है
मैं लिखता नही हूँ वाहवाही के लिए 
य़ा कि कोई दर्द है छुपाने के लिए ...
मैं लिखता नही कि वक्त कि गुज़ारिश है 
या दौर है बयानबाजी का 
मै लिखता नही इसलिए कि
कोई झांक ले मेरे दरमियाँ 
मै लिखता नही इसलिए कि मै तन्हा हूँ 
या फिर इश्क का मारा हूँ 
मै लिखता नही कि ये मेरी 'आवाज' है 
या मेरे 'अनकहे अहसास' है 
ये महज एक ख़ुदा की देन है 
सांसो की तरह मेरे साथ है 
मै लिखता हूँ ख़ुद को जिंदा रखने के लिए ....

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