खुश करने को
मैं लिखता नही कि कुछ बदलना है
मैं लिखता नही हूँ वाहवाही के लिए
य़ा कि कोई दर्द है छुपाने के लिए ...
मैं लिखता नही कि वक्त कि गुज़ारिश है
या दौर है बयानबाजी का
मै लिखता नही इसलिए कि
कोई झांक ले मेरे दरमियाँ
मै लिखता नही इसलिए कि मै तन्हा हूँ
या फिर इश्क का मारा हूँ
मै लिखता नही कि ये मेरी 'आवाज' है
या मेरे 'अनकहे अहसास' है
ये महज एक ख़ुदा की देन है
सांसो की तरह मेरे साथ है
मै लिखता हूँ ख़ुद को जिंदा रखने के लिए ....
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