Wednesday, August 15, 2018

पैगाम

थक गयी हूँ मै जागते जागते
तेरी यादों से निपट जाये तों नींद आए
क्यूँ फ़र्जी सी मुस्कराहट रहती हैं तेरे होंटों पे
पेहले की तरह खिलखिलायो तों करार आए
घुट रहा हैं जैसे मन बेरुखी से तेरी
तेरी तरफ से कोई पैग़ाम आए तों कुछ सांस आए

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