थक गयी हूँ मै जागते जागते तेरी यादों से निपट जाये तों नींद आए क्यूँ फ़र्जी सी मुस्कराहट रहती हैं तेरे होंटों पे पेहले की तरह खिलखिलायो तों करार आए घुट रहा हैं जैसे मन बेरुखी से तेरी तेरी तरफ से कोई पैग़ाम आए तों कुछ सांस आए
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