Sunday, August 5, 2018

वो शाम shyam

वो शाम, श्याम तेरे साथ ..
वो घाट और पानी में तैरती  रौशनी
तेरा चलना मेरे आगे आगे ,
मै चलूँ तेरे पीछे भागे भागे ,
शान्त सी गलियाँ ,
और मन्दिर की आरती ,
हाथ से हाथ का छू जाना ,
या दूर से मेरी नज़र तुमहे निहारती ,
तुम्हारी आँखें हज़ार बातें एक बार में कहतीं
और उसमे मै ढूँढती अपनी छवि को ,
श्याम तुम्हारे किस्से , कहानियां
उन किस्सों में शायद थोड़ा सा हिस्सा ,
मेरा भी होगा छुपा कहीँ तो .

No comments:

Post a Comment