आज़ बिखरी हैं ख़ुशबू तेरी
किताबो में रखी फ़ूल सी
कल सब रंग फीखे पड़ जायगे ..
आज़ अटी हैं शामें मेरी
तेरी यादों से
कल ज़रूर तुमको हम भूल जायगे ...
चौखट पर तेरे जो खुद ब ख़ुद बढ़ जाते हैं क़दम
कल वो रास्ता भी चूक जायगे ..
कहते हैं वक्त भुला देता हैं हर जज़्बा
पर तू शमिल हैं इस कद्र मुझ में
तुमको अलग हो कर
मेरे हालात भी मुझसे रूठ जाएंगे ...
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