क्या बला का ख़ूबसूरत रिश्ता हैं ये |
'हमसफर', 'दोस्त', 'हमराज़','सुकून' ,
जब सब रिश्ते खर्च हो जाए ,
तों अज़ीज़ गुल्लक सा लगता हैं ये |
ना माँगा कभी कुछ ,
बस दिया ही दिया हैं,
चुपचाप मेरी हर बेरुखी को सहा हैं ,
समझता हालात मेरे हर हाल में हैं,
अनकही दुआयो का साया मेरे साथ ,
सालों दर सालों टिकता हैं ये |
Copyrights@Babita Yadav 2018
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