आरज़ू बहुत थी तुम्हारी,
आरज़ूओ का कोई था छोर नही ..
तेरी ओर ही सब आरज़ूए बढ़ी
चाहते हुए भी कहीँ ओर नही ..
जादू सारे आजमाए हमने कि ,
तेरी दुआओ में हो जाए शामिल
पर जिद्दी था, तेरा दिल इतना
चला किसी जादू का ज़ोर नही ...
चीख़ती रही मेरी जज़्बाती मोहब्बत ,
कि तेरे कानो तक पहुंच जाये बात मेरी ,
मज़ाल हैं ,जो तुम पर असर हो
अरे, मेरे दिल कि आवाज़ थी कोई शोर नही ..
अब ना आरज़ू, ना आवाज़ ,
ना जज़्बात, ना चाहते ,
और ना अब बचा कोई तिलस्म जादू कोई और सही ..
Nice one
ReplyDeleteThanks
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