काफ़ी शिद्दत से तेरा इन्तेज़ार किया मैंने ...
तू हैं या नहीं फ़िर भी तेरे होने का यकीन
हर बार किया मैंने ..
सच में तो कभी नहीं
पर सपनों में हर रोज़ तेरा दीदार किया मैंने ..
उम्र बीतती गयी ...मौसम करवटें लेते रहे
तेरे आने की उम्मीद में साल दर साल बेकार किया मैंने ..
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