Monday, May 7, 2018

दिल की बातें

दिल की बातें दिल ही जाने
लाखों बार गिर कर चटका है ये ..
राह फिसलन भरी है
जैसे पथर पर जमी नमी हो
रास्ते देखे हुए है
फिर भी भटक हुआ है ये ..
नाज़ुक बेल सा
दम न अपना बचा अब
पर शौक खिलने का इतना
कि तूफ़ान से डर लगे तो भी
तेरी यादों की डाल थामे
गैर के आँगन में अटका है ये .

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