Saturday, May 19, 2018

तलाश

तलाश हैं मुझे कुछ ऐसे सुकून की ..
कि तेरी गोद में सिर रख कर सो सकूं
और जज़्बात  जब बेकाबू हो जाये
तो तेरे कांधे पर बेइन्तहा रो सकूं ...
वैसे तो हुनुर हैं मुझ में अकेले रास्ते ढूंढ़ लेने का
पर मन होता हैं कि तेरी आंखों में कभी खुद को खो सकूं ...

copyrights@Babita Yadav 2018

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