तलाश हैं मुझे कुछ ऐसे सुकून की ..
कि तेरी गोद में सिर रख कर सो सकूं
और जज़्बात जब बेकाबू हो जाये
तो तेरे कांधे पर बेइन्तहा रो सकूं ...
वैसे तो हुनुर हैं मुझ में अकेले रास्ते ढूंढ़ लेने का
पर मन होता हैं कि तेरी आंखों में कभी खुद को खो सकूं ...
copyrights@Babita Yadav 2018
No comments:
Post a Comment