बातें करते क्यूँ रुक ना पाये आँसू क्या था मलाल जो बह जाता हैं शायद कोई मज़बूरी होगी तुम्हारी वरना इतना सा प्यार तुम्हारा गैरो को भी मिल जाता हैं तुम्हारे झूठ में भी हमने सच ही सुना हमेशा वरना बातों का मतलब तो हमे भी समझ आता हैं
No comments:
Post a Comment