आज ज़माने की गल्फत से परेशान हो कर समझा कि तू ही सच में परवरदिगार हैं चंद लम्हे जो तूने रौनक -ए -वाहवाही के बक्शे भूल गये हम कि तेरी इस लम्बी सी कहानी के हम अदने से किरदार हैं
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